Tuesday, May 31, 2016

तू पातासा दे कभी तू परख ले कभी

तू पातासा दे कभी
तू परख ले कभी


तू करीब हे कभी
तू दूर हे कभी


बस कभी कभी
बस अभी अभी


धूप मे - छाव मे
प्रेम के भाव मे
करीब अभी, दूर अभी


मे सोचु और डूब जाउ
तू सुझावे तो तैर जाउ


अंदर कभी, बाहर कभी
ना तू तो हे बस अभी


रस मे बसे अभी,
कश मे चढ़े कभी
रूप मे बसे अभी,
कोश मे चढ़े कभी
रंग मे बसे अभी,
कनकन मे चढ़े कभी


आ करीब तू ज़रा अभी,
कभी मे भी देखु बारीक अभी

काल पे चढ़े जबी तो होवे कभी,
काल पे जो ना चढ़े तो होवे अभी.

काल चक्र छोड़ कर, तू बस होज़ा अभी.
काल चक्र छोड़ कर तू बस खोजा अभी.

तू और में एक हो जाये अभी
तो ना हो कमी कभी

तू पातासा दे जबभी,
पर तू परख ले अभी

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