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Thursday, November 01, 2018

तू चला

तू चला, लालच से? या चाहत से?
तू चला, मजबूरी से? या मगरूरी से?
तू चला, लचक-मचक के? या स्थिर कदम भर के?
तू चला, दौड़ के? या थंब के?
तू चला, सब के संग? या अपने ही रंग?
तू चला, क्या पाने? क्या छुपाने?
किसे भूल जाने, किससे मिलने जाने?

तू चला, बस तू चला
ना भेद-बरम था|
तू था बस, तू चला

किसने चलाया? किस लिए चलाया?
हे यह कोण जो चल रहा हे?
के हे मात्र यह आभास, चलना|

क्या वो अचल - यहा चालित नज़र आए?
हू मे अटल, अचल की और चलने|


वैभव
04-06-2018

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Image result for brain with lots of thoughts
तेरा रुकना भी चलना, तेरा झुकना भी चलना
चल बदल तू अब दिशाए

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Following verse based upon request of harshvardhan bhai. 
Thank you.

तू चला, सवाल खुद से या दुनिया से पूछने?
तू चला, अपने अंदर या बाहर या अंदर-बाहर, जवाब तलाशने?

तू चला, सवालो को लेकर जवाब ढूँढने?
तेरे जज्बात या
तू चला, जवाबो को लेकर सवाल खड़े कर?
के तेरे जज्बात. 

बात तेरी जब होगी,
मेरा ज़िक्र ज़रूर होगा|
तू फिक्र ना कर,
तू चला था, चलते रहेना
मेरा विश्वास पहनते रहेना|

तू चला, ख्वाबो- ख़यालो मे या खड़क की राहो पे?


-vaibhav
01-11-2018
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As i type this in hindi, it reminds me of song from swadesh - yun hi chala.  enjoy the musical journey.
30/10/2018

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Today, 1st of November 2018 as it gets published over here.
two gift from heart is out.

Alignment - a program to bring head-hand-heart align through various means, like yogasanas, meditation, pranayam, self-observation and painting. details here

School of Universal life - The Playground to live, learn, laugh and love integrally. - A program aiming to provide nurturing environment to be self dependent learner. for more detail visit: www.facebook.com/playground4soul/ 

more appropriate song would be main chala main chala

Friday, October 26, 2018

आधा अधूरा....

आधा अधूरा जिया हूं।
धीरे धीरे मर रहा हूं,
अधरों पे तेरा नाम, ओ राधे।

धीरे धीरे मर रहा हूं,
इस आश में,
तू आके मुझे घेरे
ना जाने दे कहीं
अपने दिल मे रखले।

अब चाँद नहीं भाता,
नाही उतना लुभाता।
पूर्णिमा के रात,
अपना अधूरापन
यह पागलपन
इन बंध दीवारों के संग बांटता।

अधूरा अधूरा जी रहा
किन्ही टुकड़ो में बटा
ना था तुझे पता?

नहीं जीना ऐसे आधा आधा
हाथ थाम लेना
हृदय थम जाये इससे पहले।
महल नही, तेरी मौजूदगी चाहिए
अब रुक मत जाना,
पहेलियां, हवेलियों के चक्कर में।
आधा आधा बन बहुत घूम लिया तु,
वन जाने से पहले,
वान उतर जाने से पहले
तू आजा ना
अधरोपे अधर लगाके नाम पूरा कर जाना।

आधा आधा कब तक जियूँ?
याद कर कर, जिंदा कब तक राखु?
धाम तेरा टूटा जरूर है,
पूरा टूट जाये, प्राण छूट जाए,
वो आखरी घड़ी मत आना।
आना है तो अब आ,
थोड़ा सा शैशव, थोड़ा सा यौवन
तुझ पर में दे दु।

आधा आधा जी रहा
राह तेरी देख रहा।
बाद नही आज
बाह पकड़ गिरिराज
कही में और नीचे ना घिर जाऊ,
यह आधा अंत
नहीं चाहिए अब कोई संत
जब अधूरा बन जिया सिर्फ तेरे लिये ओ अनंत।

आधा अधूरा....
अधूरे सब
अधर धर....
शरण तेरी चरण
करण धर



Friday, October 19, 2018

एक सवाल

एक सवाल सामने खड़ा।
पर्बत या पेड़।
एक सवाल सामने खड़ा पर्बत बन।
क्या आँसुओकी धारा बही?
शिखरों को सर करना
हिम्मत चाहिये,
सवाल को सर पर रखना।
तुम, बस प्रतिकमा करते रहो,
कभी ना कभी कृपा बरसेंगी।
कभी धारा बहती मिली
तो तुम भी बह जाना।
तुम एक थोड़ी हो,
तुम तो हमेशा अनेको के साथ जुड़े हो।
तुम्हारे पास एक सवाल थोड़ी है,
जिंदगी आये दिन तुम्हारे सामने
खड़े करती है सवाल।
पर तुम वो एक सवाल जो पर्बत बन खड़ा उसे नही,
वह सैकड़ो सवाल को सर करते रहना।
एक सवाल सामने खड़ा पेड़ बन
कौन कौन से फल फूल देगा वोह?
कब देगा?
किसको देगा?
वो तो चुपकीदी साधे बैठा है।
तुम एक सवाल से एक जवाब चाहते हो।
सारा जीवन सुलझना चाहते हो।
कभी टहनी, कभी मूल, कभी शाख या छाव या थड।
हर समय अलग , अनेकों उत्तर
अपने मन से उपजते, उसके मौन को समझते।
पर्बत या पेड़,
दोनो मौन है।
अड़िग है। अचल, स्थिर
एक झुकता , दूसरा झुकाता।
सवाल, झरनों सा घूमता भरमाता।
सवाल, टहनियों में बुनता पहेलियां।
एक नही अनेक।
पेड़ या पर्बत,
क्या वह अंतराय है?
या कोई अंत या ?
किस पर निर्भर है, वो तो निर्भय खड़ा,
तुझे पुकारता वो एक सवाल।
दिखता कितना बड़ा!
चल चले थोड़ा उस पर चढ़े
वही से दुनिया को देखे।

Optics of Life

The shadow puppet show of life, My lord watches through Million pin-hole camera. Where is lord supreme, I don't know. What I feel is all...